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आज भी प्यास बुझा रहा हैं100 साल पहले का यशवंत सागर वाटर सप्लाई प्लान
आर्किटेक्ट की इंटरनेशनल कांफ्रेंस की कर्टेन रेजिंग सेरेमनी
इंदौर. दो बार स्वच्छता में नंबर वन आ चुका इंदौर का 100 साल पहले ही सिटी प्लान इंग्लैंड के प्रेट्रिक गेड्स ने तैयार कर दिया था. शहर के सबसे पहले सिटी प्लानर पैट्रिक गेट्स की 100 साल पहले की थ्योरी के अनुसार आज भी काम हो रहा है. यशवंत सागर का पब्लिक क्वार्टर वाटर सप्लाई इसका उदाहरण है. इसके साथी शहर की खान नदी, मंदिर छतरियां, हरियाली के साथ इकोलॉजी के फंडे सही साबित हो रहे हैं.
100 साल पहले पैट्रिक गेट्स थ्योरी पर बात करते हुए डॉ. एस पी सिंग हेड ऑफ द डिपार्टमेंट स्कूल ऑफ एनवायरनमेंट एनर्जी डीएवीवी ने कहीं. शहर के सबसे पहले सिटी प्लानर पैट्रिक गेड्स की याद में इस साल सितम्बर में होने वाली आर्किटेक्ट की इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस की कर्टन रेजिंग सेरेमनी स्कूल ऑफ आर्किटेक्ट आई पी एस अकादमी में हुई.
सेरेमनी में इंदौर की प्लॉनिंग के लिए लिखी गई पैट्रिक गेड्स की थ्योरी पर जयंत राव सहस्त्रबुद्धे सेक्रेट्री विज्ञान भारती और डॉ. एस.पी. सिंग ने कई बातें भावी आर्किटेक्ट से साझा की. जयंत सहस्त्रबुद्धे ने बताया के इंदौर के महाराजा होल्कर के बुलावे पर सिटी प्लान के लिए इंग्लैंड से पैट्रिक गेट्स शहर आए थे. शहर का मुआयना करने के बाद गेट्स ने महाराजा होलकर से 1 दिन के लिए राजा बनाने को कहा.
हाथी पर बैठकर शहर भर का मुआयना करने के बाद सिटी प्लान के लिए कई सारे प्वाइंट्स दिए जिसमें नदियों को बचाने, मंदिर इमारतों छत्रियों की धरोहरों को सवारने, हरियाली को बढ़ावा देना, शहर में पानी की सुचारु व्यवस्था आदि की योजनाएं शामिल थी. उस समय शहर में प्लेग फैला हुआ था इसलिए स्वच्छता का भी एक पॉइंट शामिल किया गया था. महाराजा होलकर को 1918 में 32 चैप्टर के किताब दरबार आफ इंदौर के रूप में रिपोर्ट दी .
100 साल पहले बने सिटी प्लान के पॉइंट्स आज भी सही साबित हो रहे हैं.सौ साल पहले भी हुई थी सफाई की बातडॉ. एसपी सिंग ने कहा कि 100 साल पहले भी स्वच्छता की बात कही गई थी. आज भी शहरवासी इसी दौड़ में शामिल है और दो बार शहर को स्वच्छता में नंबर वन आने का अवार्ड प्राप्त करा चुके हैं. हमारे तीज त्यौहार कितने अच्छे हैं की उनमें ही स्वच्छता की बात कही गई है. दीवाली में घर घर में सफाई होती है.
कॉलेज के चैयरमैन वास्तुविद अचल चौधरी ने भी इस दौरान अपने विचार व्यक्त करते हुए 100 साल पहले बने मास्टर प्लान को बेहतर बताया. प्राचार्या मनीता सक्सेना ने बताया कि प्रोग्राम में बड़ी संख्या में छात्र और फ़ैकल्टी मेम्बर मौजूद थे.


